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शिशु की मालिश: संपूर्ण विवरण-Shishu KI Maalish

गांवों में बच्चे को दिन में चार पांच बार मालिश तो होती ही थी, नवजात से लेकर छः महीने तक के बच्चे को लेकर अगर कोई कहीं भी किसी के घर जाते तो गृहस्वामी स्वागत सर में तेल लगाकर करते। इसके पीछे सोच शायद ये कि बच्चे की खोपड़ी की हड्डी और शरीर को मजबूती तेल से ही मिलती है। पर वहां हाथ पैर को मोड़ मोड़कर, रगड़ रगड़कर, हाथ, कलाई, पैर और और दोनों कान पर हाथ डालकर कनपटी से हथेलियों के बीच उसे दबाकर उठाते, हवा में उछालते, नाक कान में सरसों तेल डालते, बच्चा रोता रहता, ये देखकर डर लग जाया करता था। आजकल ऐसा करने को सही नहीं समझा जाता। आराम से हल्के हाथों से मालिश करिए। मालिश आप घर के बने सरसों तेल से कर सकती हैं, पर बाजार के सरसों तेल में झौंस के लिए मिलावट की जाती है, इसलिए इसका उपयोग ठीक नहीं है। रसोई के अन्य तेल, जैसे नारियल, जैतून, तिल, अवोकेडो के तेल आप मालिश में प्रयोग में ला सकती हैं। इसके अलावा जॉन्सन एंड जॉन्सन और दूसरी कंपनियों के बेबी ऑयल भी बाजार में हैं। डाबर लाल तेल जैसी कुछ आयुर्वेदिक तेल भी। आप चाहें तो घर में भी मालिश के लिए तेल में लौंग, अदरक, नीम, पिप्पली आदि को तेल में उबालकर, फिर तेल को छानकर ठंडा करके रख सकती हैं। मालिश के समय तेल को चाहें तो हल्का गुनगुना कर लें। लेकिन बाजार से लिए गए बेबी ऑयल को गर्म न करें, इसमें अतिरिक्त रूप से मिलाया गया विटामिन ई खराब हो जाएगा।

 

बच्चे को आरामदायक स्थिति में या गोद में लिटायें:  ऐसा कमरा चुनें जिसमें रौशनी और थोड़ी गर्माहट हो, पर पसीना न आए बच्चों को, इसलिए गर्मी में पंखा चलाकर रखें।

-अगर आप बच्चे को सुलाने के लिए मालिश कर रहीं हैं तो मालिश उसके सोने की जगह के पास में करें ताकि अगर वो बीच मालिश में सो जाये तो आप उससे आसानी से उसके पालने में लिटा सकें ।

 

  • बच्चे की पीठ, पेट, हाथों, पैरों, सर और गर्दन पर हल्के हाथों से अच्छी तरह मालिश करें।
  • जैसे जैसे आपका बच्चा बड़ा हो, आप थोड़े से और दबाव से मालिश कर सकती हैं ।

 

  • बच्चे की घुमावदार तरीके से मालिश:ऐसी मालिश से बच्चे को काफी आनंद मिलता है। इसमें शरीर पर हाथ गोलाकार घुमाते हुए मालिश की जाती है।

 

जब वो चिड़चिड़ा हो रहा हो और दूध पीने आदि से शांत न हो तो मालिश करें: मालिश करने से आप अपने बच्चे को नजदीकी और सुरक्षा का एहसास देते हैं और उसका चिड़चिड़ापन कम हो जाता है । कई माता पिता मालिश करके ही अपने बच्चे को शांत करते हैं |

  • फीडिंग के 45 मिनट बाद तक मालिश न करें । अगर आप खाने के ठीक बाद उसकी मालिश करेंगे तो उसका पेट ख़राब हो सकता है । बच्चे उलटी कर सकते हैं।
  • अगर बच्चा मालिश के समय ज्यादा रोने लगे तो उस समय मालिश रोक दें।
  • अगर आपको ऐसा लगे की मालिश के वक़्त बच्चे को कहीं दर्द हो रहा है तो हलके हाथ से मालिश करें । अगर मालिश करने के तरीके से कोई परेशानी नहीं है तो उसे शिशु रोग विशेषज्ञ के पास ले जायें ।
  • अगर बच्चा मालिश का आनंद ले रहा है तो वह आपके स्पर्श से खुश होगा ।

मालिश का समय: शुरुआत में पांच मिनट तक मालिश करें । इससे बच्चे को मालिश की आदत पड़ने में आसानी होगी, धीरे धीरे करके वक़्त को आधे घंटे तक बढ़ाएं।

मालिश के बहुत फायदे होते हैं, इससे आपके बच्चे की वृद्धि तेज होती है, हड्डियां मजबूत होती है, त्वचा को पोषण मिलता है, त्वचा की नमी बनी रहती है और डिहाइड्रेशन रुकता है, साथ ही उसे हड्डियों के बढ़ने और मांसपेशियों के खिंचने की उम्र में राहत मिलती है, और शरीर में नई कोशिकाओं के निर्माण के लिए आवश्यक वसा भी मिलता है। उसे बीमारी से लड़ने की ताक़त मिलती है और पाचन सही रहता है । इससे उसका मानसिक विकास भी अच्छे से होता है ।

  • इसके इलावा बच्चे की मालिश करने से मां बच्चे के आपसी भावनात्मक रिश्ते में मजबूती आती है।
  • छाती और पेट की मालिश:इस जगह पर मालिश करने से बच्चा बहुत जल्दी शांत हो जाता है । उसकी छाती और पेट पर ऊपर से नीचे हाथ लाते हुए मालिश करें। नीचे से ऊपर करने पर फूड रिफ्लेक्स के चलते उल्टी आ सकती है। आप हल्के हाथों को घड़ी की दिशा में गोल घुमाते हुए भी मालिश कर सकती हैं।

चेहरे और सर की मालिश करना: अपनी उँगलियों से उसके सर पर गोलाकार रूप से घुमाएं। माथे और गालों पर घुमाएं – नाक पर हल्के हाथ से तेल लगा दें।

पीठ की मालिश: हलके हाथ से बच्चे को पेट के बल लिटायें । उसकी पीठ पर बीच से बाहर की तरफ को मालिश करें । उसके कंधे न पकडें पर गोलाकार में उसके कन्धों और नीचे की पीठ को मलें ।

सलाह

  • अपने बच्चे से आहिस्ता से बात करती रहें।
  • घर से बाहर रहें तो डायपर पहनाकर मालिश करें, ताकि पेशाब करने पर दिक्कत न हो।

चीजें जिनकी आपको आवश्यकता होगी

  • मालिश के लिए बच्चे को लिटाने हेतु तौलिया या छोटी चादर
  • खाद्य तेल या कोई बेबी ऑयल

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