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गर्भ के दौरान कैसे रखें अपना ध्यान- Pregnancy Care Tips

हेल्थ टिप्स इन हिंदी

गर्भावस्था का पता लगते ही डॉक्टर से मिलें और परामर्श अनुसार प्रीनेटल विटामिन और मिनरल्स (यथा, फॉलिक एसिड, आयरन आदि) लेते रहें। डॉक्टर हर महीने आपको मिलने के लिए परामर्श देगा और जरूरत पड़े तो वह जल्द जल्द भी बुला सकता है। डॉक्टर के कहे अनुसार जाँचें करवाते रहें।

इसके अलावा, घर पर आप परामर्श के अनुसार आराम और व्यायाम करें। अगर डॉक्टर ने बेडरेस्ट नहीं कहा है तो आप काम पर जाना, घर के काम, तैरना आदि और हल्के फुल्के व्यायाम लगभग 30 मिनट तक करती रह सकती हैं। लेकिन जहाँ आपको अधिक चलना पड़ता है या एस्बेस्टस, भारी धातुओं आदि का काम होता है, वहाँ काम करना आपके लिए खतरनाक हो सकता है। व्यायाम करते समय यदि छाती या पेट में दर्द हो, आँखों के आगे अंधेरा छाने लगे या चक्कर आए तो व्यायाम न करें। अधिक थकान होने पर भी तुरंत व्यायाम रोक दें।

भोजन संबंधी एहतियात

गर्भावस्था के दौरान वजन बढ़ना स्वाभाविक भी है और जरूरी भी। दस-पंद्रह किग्रा तक वजन बढ़ना सामान्य है। अगर आपका वजन सामान्य से कम है तो आपको ज्यादा वजन बढ़ाना चाहिए। इसके लिए आप दिन में चार-पाँच बार थोड़ा थोड़ा करके खाएँ। इससे खाना पचने में आसानी रहेगी और आपके शरीर में ग्लुकोज की मात्रा नियंत्रित रहेगी।

मांस, अंडे और मछलियाँ अच्छी तरह पकाकर खाएँ। समुद्री मछलियाँ न खाएँ। इनमें पारा जैसे भारी धातु हो सकते हैं।

फल और सब्जियाँ अच्छी तरह धोकर और छीलकर खाएँ।

डेयरी – डेयरी उत्पाद आपके और आपके शिशु की कैल्शियम संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करता है। लेकिन गैर-पाश्चरीकृत डेयरी उत्पाद, जैसे चीज के सेवन से जहाँ तक हो सके, बचें। इनमें बैक्टीरिया हो सकता है।

चीनी की जगह आप सामान्यतः किसी अन्य स्वीटनर का भी उपयोग कर सकते हैं।

कैफ़ीन वाले पेय, जैसे चाय, कॉफी का अधिक सेवन न करें। इससे कैफ़ीन की मात्रा बढ़ने के साथ ही डिहाइड्रेशन भी हो सकता है।

अधिकांशतः पके हुए भोज्य पदार्थों का ही सेवन करें।

फल, जूस, नारियल पानी, अधिक से अधिक पानी का सेवन करें।

जी मिचलाने की स्थिति पर नियंत्रण के लिए हमेशा कुछ मेवा या बिस्कुट आदि साथ रखें और थोड़ी थोड़ी देर पर खाती रहें।

(नोट: पपीता, हींग के बारे में आयुर्वेदाचार्यों का मानना है कि ये गर्भावस्था में हानिकारक हो सकते हैं।)

दवाएँ:

डॉक्टर के बताए अनुसार जरूरी दवाएँ सही समय पर लेती रहें। असावधानी नुकसानदेह हो सकती है। अपने मन से कोई दवा न लें।

गर्भावस्था के दौरान थकान, पैरों में ऐंठन, कब्ज, दाँतों व मसूड़ों की समस्या, बार-बार पेशाब आना, त्वचा पर स्ट्रेच मार्क, पाँव या चेहरे में सूजन, सीने में जलन, योनि मार्ग में जलन (यीस्ट का संक्रमण), नाक से खून आना, गंध तेज महसूस होना आदि समस्याएँ आम होती हैं।

इनसे बचने के लिए समुचित आराम भी करें। हो सके तो दिन में भी दो घंटे की नींद लें या कम से कम आधे घंटे आराम करें। पूरा दिन बैठी न रहें, बीच-बीच में उठकर थोड़ी दूर चल लें। भोजन में फाइबर की अच्छी मात्रा होने से कब्ज नहीं रहेगा। इसलिए भी फल और सब्जियाँ आपके लिए फायदेमंद हैं। त्वचा पर किसी तेल या क्रीम से हल्की मालिश कर सकती हैं। इससे स्ट्रेच मार्क से बचने में सहायता मिलेगी। विटामिन ई युक्त क्रीम या लोशन आपके लिए अधिक फायदेमंद रहेगी। पेशाब के समय जलन महसूस होने पर या दाँत में दर्द अथवा मसूड़ों से खून आने पर डॉक्टर से मिलें।

अधिक गर्मी से बचने के लिए पानी बार-बार पीती रहें।

धूम्रपान न करें। इससे गर्भपात, समय से पहले प्रसव, शिशु का वजन कम होना और अन्य समस्याएँ हो सकती हैं।

नशीली दवाओं, जैसे कोकीन, हेरोइन, मारिजुआना और अल्कोहल के सेवन से परहेज करें। पालतू जानवरों की साफ सफाई से बचें।

आमतौर पर गर्भावस्था में शारीरिक संबंध बनाना खतरनाक नहीं होता। लेकिन इसके बारे में डॉक्टर से स्पष्ट रूप से बात करें।

अगर आपको योनिमार्ग से रक्त या किसी अन्य तरह का स्राव दिखाई दे, चेहर या उंगलियों में ज्यादा सूजन महसूस हो, तेज सिरदर्द लगातार बना रहे, जी मिचलाने और उल्टी के चलते गंभीर स्थिति हो या यह पहली तिमाही के बाद भी बना रहे, चक्कर आए, धुंधला दिखाई दे, पेट में मरोड़ या तेज दर्द हो, कंपकंपी लगे या बुखार आए, बच्चा चलता फिरता न महसूस हो या आपके द्वारा भोजन करने के बाद भी असामान्य रूप से शांत लगे तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

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