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कैंसर कैसे होता है, और Cancer से बचने के उपाय-Healthy Kaise Rahe

Cancer

Cancerकैंसर उन रोगों में है, जिसका नाम भी लेने से कुछ समय पहले तक लोग कतराते थे. इतना भय इसलिए कि लोगों को लगता था कि इसका कोई इलाज नहीं. साथ ही, लोग यह भी सोचते थे कि यह गिने चुने लोगों को होने वाली बीमारी है. पर आज के दौर में ये दोनों ही बातें गलत सिद्ध हुई हैं. एक तो यह बहुत सारे लोगों को अपना शिकार बना रही है,
कोई भी इसमें शामिल हो सकता है. किसी स्वास्थ्यमंत्री के कहे अनुसार कोई पूर्वजन्म या इस जन्म का पाप नहीं होता ये. और अगर आरंभिक अवस्था में पता चल गया तो इसका इलाज संभव है.

लेकिन जैसा कि आप सब जानते हैं “Prevention is better than Cure”, तो आज बात बचाव पर.

कुछ चीेजें हमारे हाथ में नहीं होती, पर जो होती है, वो जरूर आजमाइए. और वे बातें इस प्रकार हैं:

1. तम्बाकू का किसी भी रूप में उपयोग न करें. (खैनी से मसूड़ों, तालू, जीभ, गले व शरीर के किसी भी अंग का कैंसर हो सकता है, क्योंकि मुंह की त्वचा द्वारा निकोटिन अवशोषित होकर रक्त में मिलने लगता है. धूम्रपान के रूप में निकोटिन का जहरीला धुआँ, टार फेफड़े में जमा होने लगता है और इसके असर से श्वासनली सिकुड़ने लगती है, फेफड़े ठीक
से फैलने, सिकुड़ने की क्षमता खो देते हैं, शरीर को ऑक्सीजन मिलनी कम हो जाती है, और निकोटिन के प्रभाव से कोशिकीय परिवर्तन होने के कारण कैंसर हो सकता है.) परोक्ष रूप से धूम्रपान से भी बचें.

2. सूर्य की पराबैगनी किरणें त्वचा की कोशिकाओं में उत्परिवर्तन ला सकती हैं, जो एलर्जी, लाली, झाई, खुजलाहट, खुश्की आदि कई रोगों के साथ ही कैंसर का कारण भी बन सकता है. तो धूप में जाने से पहले बादाम या नारियल के तेल, या सनस्क्रीन का उपयोग करें. खासकर गोरी त्वचा, सफेद दाग व एल्बेनिज्म ग्रस्त त्वचा धूप के प्रति अधिक संवेदनशील
होती है, क्योंकि पराबैगनी किरणों के दुष्प्रभाव से प्राकृतिक रूप से बचाने के लिए उनकी त्वचा में मेलेनीन नाम का प्रोटीन नहीं बनता. विटामिन डी पराबैगनी किरणों के प्रभाव से बचाता है, पर यह धूप में रहने से ही बनता भी है. इसलिए कुछ देर तक धूप में रहना भी जरूरी है. तो तेल या सनस्क्रीन इन मौकों पर आपके लिए विशेष रूप से उपयोगी है.

3. हॉर्मोनल थेरेपी आजकल मजबूरी बन गई है. मूड स्विंग, डिप्रेशन, अन्य मानसिक बीमारियों, पीरियड्स से जुड़ी समस्याओं, मां या पिता बनने में समस्या, ब्लड प्रेशर, कैंसर की दवाओं और परिवार नियोजन गोलियों आदि में स्टेरॉयड का उपयोग होता है. गर्भावस्था के दौरान भी हार्मोनल थेरेपी दी जाती है. बाल उगाने, झड़ने से बचाने और अनचाहे बालों से
मुक्ति पाने के लिए भी कई बार हॉर्मोन चिकित्सा काम में लाई जाती है. लेकिन हॉर्मोन चिकित्सा कैंसर का कारण बन सकती है. खासकर पुरुषों के प्रोस्टेट कैंसर और महिलाओं के ब्रेस्ट, ओवरी या सर्विकल कैंसर के मामले में. हो सके तो हॉर्मोनल थेरेपी से बचें.

4. अधिक आयु में पहली संतान का जन्म, संतान को स्तनपान न कराना ब्रेस्ट कैंसर की वजह बन सकती है तो कई बार मां बनना, पीरियड्स के समय साफ सफाई न रखना, असुरक्षित शारीरिक संबंध (पैपिलोमा वायरस से संक्रमित साथी से संबंध) सर्विकल कैंसर (गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर) का कारण बन सकता है. हर बच्ची को (प्रथम बार शारीरिक संबंध बनाने
से पहले) ह्यूमन पैपिलोमा वायरस का वैक्सीन दिलवाना जरूरी है. ध्यान रखें, पुरुष इस वायरस के कैरियर का काम करते हैं. वे खुद बीमार नहीं होते, पर अपनी साथी को संक्रमित एवं बीमार कर सकते हैं.

5. एंटी ऑक्सीडेंट अधिक से अधिक मात्रा में लें. ऑर्गेनिक फूड, लाल, पीली व हरी सब्जियां, खासकर गोभी, टमाटर, फल, खासकर आँवला, संतरा, ग्रीन टी, भारतीय मसालों का सेवन करें. पर तेजपत्ता, अदरक, हींग, रिफाइंड ऑयल, वनस्पति घी का सेवन करने में कुछ संयम बरतें. मैदा, ब्रेड, कोल्ड ड्रिंक, शराब, अधिक मीठा खाने से जितना हो, बचें. पेट में
अल्सर हो तो अधिक खट्टा, तीखा खाने से भी जरूर बचें. इससे आमाशय व आँतों का कैंसर हो सकता है. जंतु वसा, फास्ट फूड, अजीनोमोटो से यथासंभव दूरी रखें.

6. तो प्लास्टिक के बरतन का उपयोग न करें तो बेहतर. कम से कम पॉलीथीन में खाने पीने की चीजें न रखें. ये केमिकल और ताप के प्रभाव में खाने पीने की चीजों से मिलकर विषैला प्रभाव छोड़ते हैं. पर डेयरी उत्पाद, जैसे दूध, दही, छाछ और कई अन्य चीजें पॉली बैग में ही आते हैं और ऐसे में हमारे पास विकल्प ही नहीं होता.

7. सिंदूर, लिपस्टिक के प्रभाव भी स्वास्थ्य की दृष्टि से उपयुक्त नहीं. इसमें पारा, सीसा जैसे विषैले रसायन होते हैं. हालांकि पुराने समय में सिंदूर एक पेड़ के फलों के बीज, हल्दी, गुड़हल और कचनार, केसर के फूल को पीसकर बनाया जाता था. इस विधि से बने सिंदूर में औषधीय गुण होते थे, इसलिए इनके उपयोग को इतनी महत्ता प्राप्त हुई.

8. कश्मीर में ठंड के समय में लोग कपड़ों के भीतर कांगड़ी (एक खास तरह की अंगीठी) बांधकर चलते हैं. इससे उन्हें पेट या पेट की त्वचा का कैंसर हो सकता है.

9. आजकल प्रचलन में रहने वाली इंस्टेंट मेंहदी से कई लोगों को खुजलाहट व एलर्जी की शिकायत होती है. इसके साथ ही, ये केमिकल युक्त मेंहदी कैंसर के कारण भी बन सकते हैं. प्राकृतिक मेंहदी पत्ते अगर उपलब्ध हो तो उसका उपयोग करें.

10. अगर कोई दांत नुकीला हो, जिससे जीभ बार बार कट रही हो तो दंत चिकित्सक से मिलें. बार बार जीभ कटने से भी जीभ की त्वचा व ग्रंथियों की कोशिकाएँ उत्परिवर्तित होना शुरू कर सकती हैं और जीभ के कैंसर का खतरा हो सकता है.

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